शिव और कालभीति सम्वाद

शिव और कालभीति सम्वाद

सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के आधार पर भी वर्गीकरण हो सकता है | ऐसा हम कभी नहीं सोचते | वर्गीकरण, विभिन्न गुणों के आधार पर होता है, अध्ययन किया जाता है किन्तु मनुष्य का वर्गीकरण, सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के आधार पर क्यों नहीं किया जा सकता है ? कैसे एक आदमी दुसरे आदमी से…

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satya spirit first coaching 1 ईश्वर है या नहीं, नन्दभद्र की कथा

ईश्वर है या नहीं, नन्दभद्र की कथा

ईश्वर का प्रतिपादन, नन्दभद्र की कथा बुद्धिश्च हायते पुंसां नाचैत्तगह समागमात |मध्यस्थेमध्यताम याति श्रेष्ठताम याति चौत्तमे || नारद जी कहते हैं – नन्दभद्र नाम का एक वणिक था | धर्मों के विषय में जो कुछ कहा गया है, उसमें कोई भी ऐसी बात नहीं थी, जो नन्दभद्र को ज्ञात न हो | किसी के साथ…

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कलियुग

कैसा होगा कलियुग ?

कलियुग की प्रवृत्ति का वर्णन कलेर्दोषेनिवेश्चैव शृणु चैकं महागुणं |यदल्पेन तु कालेन सिद्धि गच्छति मानवाः || (1)त्रेतायां वार्षिको धर्मो द्वापरे मासिकः स्मृतः |यथा क्लेशं वरन प्राश्स्तहा प्राप्यते कलौ ||  (2)दुगत्रयेण तावन्तः सिद्धि गच्छन्ति पार्थिव |यावन्तः सिद्धिमाद्यन्ति कलौ हरिहर्व्रताः || (3) अब कलियुग की प्रवृत्ति सुनो | कलियुग में तमोगुण से व्याकुल इन्द्रियों वाले मनुष्य माया,…

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श्राद्ध

श्राद्ध में चढ़ाए पिंड और जल को पूर्वज कैसे ग्रहण करते हैं ?

श्राद्ध के विषय में, नारद जी और अर्जुन का संवाद नारद जी कहते हैं – अर्जुन ! इसके बाद राजा करन्धम ने महाकाल से पूछा – भगवन ! मेरे मन में सदा ये संशय रहता है की मनुष्यों द्वारा पितरों का जो तर्पण किया जाता है, उसमें जल तो जल में ही चला जाता है;…

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शिव कालभीति

कालभीति का शिवजी से वाद-विवाद

शुद्ध और अशुद्धता पर कालभीति का शिव जी से वाद-विवाद न जायते कुलम यस्य बीजशुद्धि बिना ततः |तस्य खादन पिबतृ वापि साधुः सांदति तत्क्षणात् || कालभीति एक बिल्व वृक्ष के नीचे एक पैर के अंगूठे के अग्र भाग पर खड़े हो मंत्रों का जाप करने लगे | जाप  का नियम ग्रहण करने के पश्चात वे सौ…

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समय

समय का मान – शास्त्र ज्ञान

समय का मान – स्कन्द पुराण अब मैं तुमसे काल का मान बताऊंगा, उसे सुनो – विद्वान लोग पंद्रह निमेष की एक ‘काष्ठा’ बताते हैं । तीस काष्ठा की एक ‘कला’ गिननी चाहिए । तीस कला का एक ‘मुहूर्त’ होता है । तीस मुहूर्त के एक ‘दिन-रात’ होते हैं । एक दिन में तीन तीन…

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माता

माता और पिता में से उत्तम कौन ?

पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि  परमं तपः । पितरि प्रितिमापन्ने सर्वाः प्रोणन्ति देवताः ।। यह सन्दर्भ चिरकारी की कथा से लिया गया है जिसमें चिरकारी माता और पिता के महत्त्व को लेकर असमंजस में हैं । उनके पिता ने उन्हें अपनी माता का वध करने का आदेश दिया । क्योंकि वो चिरकारी थे अतः…

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maxresdefault 1 पाप प्रवृत्ति तो आश्चर्य का विषय है

पाप प्रवृत्ति तो आश्चर्य का विषय है

परस्त्री सम्बन्ध पाप से क्या हानि मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।।अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान  करने के लिए गए और जब उन्होंने पांच ग्राहों को श्राप मुक्त कराया और उन पांचो सुंदर स्त्रियों से ग्राह्स्वरूप में श्रापग्रस्त…

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धर्म तीर्थाटन शंकराचार्य गुरुस्तव

धर्माचरण में मृत्यु हो तो क्या होगा ?

धर्म के पालन में जीवन का मोह – उचित या अनुचित ? यज्जीवितं चाचिराम्शुसमानम क्षण्भंगुरम, तच्चेधर्मक्रते याति यातु दोषोअस्ती को ननु ।जीवितं च धनं दारा पुत्राः क्षेत्रं ग्रहाणी च, याति येषाम धर्मक्रेते त एव भुवि मानवाः ।। सन्दर्भ – एक बार अर्जुन बारह वर्षो के लिए तीर्थयात्रा के लिए निकले । वह मणिपुर होते हुए…

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swami vivekananda indian statue sculpture जीवन में श्रेष्ठ धर्म क्या है ?

जीवन में श्रेष्ठ धर्म क्या है ?

धर्मे रागः श्रुतो चिंता दाने व्यसनमुत्तमम । इन्द्रियार्धेषु वैराग्यं संप्राप्तं जन्मनः फलम ।। सन्दर्भ – कात्यायन ने धर्म को समझने के लिए कठोर तप किया, जिस से आकाशवाणी हुई और उसने कहा की हे कात्यायन तुम पवित्र सरस्वती नदी के तट पर जा कर सारस्वत मुनि से मिलो । वे धर्म के तत्व् को जान…

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