Category: Jyotish
ज्योतिष और आयुर्वेद का जादुई सम्बन्ध
ज्योतिष और आयुर्वेद का गहरा सम्बन्ध है | जो आयुर्वेदाचार्य ज्योतिष नहीं जानता और जो ज्योतिषी आयुर्वेद नहीं जानता, वो दोनों ही अपनी विद्या में पूर्णता नहीं प्राप्त कर पाते | एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ, शनि का तत्व बताया गया है, वायु | जिसकी कुंडली में शनि से कष्ट है, उसको वायुजनित रोग…
आलसी होने की आदत का हल – बली बुध
आप सभी ने देखा होगा कि कुछ लोग आलसी होते हैं, उन्हें आराम या खाली बैठना या सोना बहुत प्रिय होता है । ऐसे ही कुछ लोग होते हैं, जो एकदम खाली नहीं बैठते, बहुत मेहनत करते हैं, लगातार किसी न किसी काम में जुटे रहते हैं और आवश्यकता से अधिक नहीं सोते हैं ।…
samudra manthan story with relation to Astrology
हम कथाएं पढ़ते हैं लेकिन कथाओं के पढ़ते समय, उनमें लिखी बातों पर चिंतन करना चाहिए ! समुद्र मंथन की कथा, सभी ने सुनी होगी लेकिन उसमें राहु और केतु का जिक्र आता है लेकिन राहु और केतु हैं क्या ? क्यों इनको नवग्रह में गिना जाता है, जबकि ये तो असली ग्रह भी नहीं…
कर्म बड़ा या भाग्य – भाग 1
सभी लोग कभी न कभी कर्म और भाग्य की चर्चा करते हैं किन्तु वो चर्चा बहुधा सुनी सुनाई बातों पर ही आधारित होती है | वो कितनी शास्त्रोक्त है और क्या उस विषय की सम्यक विवेचना कहीं पर की जाती है | आम बोलचाल में तो नहीं | हमें कर्म और भाग्य के सम्बन्ध को…
ज्योतिषी से फायदा कैसे उठायें ?
कल बहुत से लोगों ने फेसबुक पर अपनी कुंडली बताई, दिखाई और अपनी जिज्ञासा रखी | बहुत से लोगों ने फीस भी पूछी और मैंने बताया कि मैं कोई फीस नहीं लेता, तो आश्चर्य भी किया | पर अब सोच रहा हूँ कि फीस रख ही लेता हूँ, लोग अगर फीस वाले ज्योतिषी को ही…
ज्योतिष बेसिक्स, भाग 2
अध्याय २ योजनानि शतान्यष्टो भूकर्णों द्विगुणानि तु | तद्वर्गतो दशगुणात्पदे भूपरिधिर्भवते || अर्थात पृथ्वी का व्यास 800 के दूने 1600 योजन है, इसके वर्ग का 10 गुना करके गुणनफल का वर्गमूल निकालने से जो आता है, वह पृथ्वी कि परिधि है | इस श्लोक को विस्तार से आगे चर्चा करेंगे किन्तु इस श्लोक से स्पष्ट हो…
ज्योतिष शास्त्र – अध्याय 1
पहले ये वीडियो देखें, फिर आगे पढ़ें | लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः |स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते || अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है | यह भी दो प्रकार का होता है (१) स्थूल और (२) सूक्ष्म | स्थूल…
वारों के नाम कैसे रखे गए ? सोमवार के बाद मंगलवार ही क्यों ?
इस बार की बालसंस्कारशाला 16 में बच्चों को बताया कि सोमवार के बाद मंगलवार ही क्यों आता है और शनिवार के बाद रविवार ही क्यों आता है ? शुक्रवार क्यों नहीं आ जाता ? बच्चों को बताया कि पृथ्वी एक दिन में 360 अंश (अंश यानि डिग्री) घूमती है और एक राशि 30 अंश की…
बालसंस्कारशाला 15
इस बार की बालसंस्कारशाला में राशिचक्र के बारे में बताया, कि कैसे 360 डिग्री का एक राशिचक्र होता है और 12 भागों (राशियों) में बाटंने से, एक राशि 30 अंश की हुई | सूर्य इन 12 राशियों में क्रम से जाता है (Geocentric and Heliocentric system भी समझाया गया), एक राशि से जब सूर्य दूसरी…
बालसंस्कारशाला – 14
बालसंस्कारशाला (स्टोरीटेलिंग) – 12————————————— इस बार की बालसंस्कारशाला में बच्चों को ज्योतिष में से राशियाँ पढ़ाने के लिए, पहले कोण समझाया गया (बच्चे तीसरी कक्षा के थे तो कोण भी सही नहीं जानते थे) | वृत्त में ३६० डिग्री होते हैं, ये समझाना और फिर बताना कि पृथ्वी भी वृत्त में ही घूमती है अतः…
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