पापकर्मों के फल

धर्मदानकृतं सौख्यमधर्माद दुखःसंभवम् | तस्माधर्मं सुखार्थाय कुर्यात पापं विवर्जयेत || लोकद्वयेऽपि यत्सौख्यं तद्धर्मात्प्रोच्यते यतः | धर्म एव मर्ति कुर्यात सर्वकार्यातसिद्धये || मुहूर्तमपि जीवेद्धि नरः शुक्लेन कर्मणा | न कल्पमति जीवेश लोकद्वयविरोधिना ||                        – स्कन्द पुराण धर्मं और दान से सुख प्राप्त होता है और अधर्म से दुःख की उत्पत्ति होती है, अतः सुख के लिए…

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कमठ द्वारा शरीर वर्णन

भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे बताओ | कमठ ने कहा – विप्रवर ! जैसा यह ब्रह्माण्ड है, वैसा ही यह शरीर भी बताया गया है | पैरों का…

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जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया – ‘जीव कैसे उत्पन्न होता है ?’ कमठ ने कहा – ब्राह्मण ! पहले गुरु को, उसके बाद धर्म को नमस्कार करके मैं इस वेदवर्णित प्रश्न का यथाशक्ति समाधान करूँगा ! जीव के जन्म लेने…

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संसार सृष्टि

मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।। अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान  करने के लिए गए और जब उन्होंने पांच ग्राहों को श्राप मुक्त कराया और उन पांचो सुंदर स्त्रियों से ग्राह्स्वरूप में श्रापग्रस्त होने का कारण पुछा तब…

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