Category: कुंडली
ज्योतिष और आयुर्वेद का जादुई सम्बन्ध
ज्योतिष और आयुर्वेद का गहरा सम्बन्ध है | जो आयुर्वेदाचार्य ज्योतिष नहीं जानता और जो ज्योतिषी आयुर्वेद नहीं जानता, वो दोनों ही अपनी विद्या में पूर्णता नहीं प्राप्त कर पाते | एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ, शनि का तत्व बताया गया है, वायु | जिसकी कुंडली में शनि से कष्ट है, उसको वायुजनित रोग…
आलसी होने की आदत का हल – बली बुध
आप सभी ने देखा होगा कि कुछ लोग आलसी होते हैं, उन्हें आराम या खाली बैठना या सोना बहुत प्रिय होता है । ऐसे ही कुछ लोग होते हैं, जो एकदम खाली नहीं बैठते, बहुत मेहनत करते हैं, लगातार किसी न किसी काम में जुटे रहते हैं और आवश्यकता से अधिक नहीं सोते हैं ।…
ज्योतिषी से फायदा कैसे उठायें ?
कल बहुत से लोगों ने फेसबुक पर अपनी कुंडली बताई, दिखाई और अपनी जिज्ञासा रखी | बहुत से लोगों ने फीस भी पूछी और मैंने बताया कि मैं कोई फीस नहीं लेता, तो आश्चर्य भी किया | पर अब सोच रहा हूँ कि फीस रख ही लेता हूँ, लोग अगर फीस वाले ज्योतिषी को ही…
ज्योतिष शास्त्र – अध्याय 1
पहले ये वीडियो देखें, फिर आगे पढ़ें | लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः |स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते || अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है | यह भी दो प्रकार का होता है (१) स्थूल और (२) सूक्ष्म | स्थूल…
बालसंस्कारशाला 15
इस बार की बालसंस्कारशाला में राशिचक्र के बारे में बताया, कि कैसे 360 डिग्री का एक राशिचक्र होता है और 12 भागों (राशियों) में बाटंने से, एक राशि 30 अंश की हुई | सूर्य इन 12 राशियों में क्रम से जाता है (Geocentric and Heliocentric system भी समझाया गया), एक राशि से जब सूर्य दूसरी…
बालसंस्कारशाला – 14
बालसंस्कारशाला (स्टोरीटेलिंग) – 12————————————— इस बार की बालसंस्कारशाला में बच्चों को ज्योतिष में से राशियाँ पढ़ाने के लिए, पहले कोण समझाया गया (बच्चे तीसरी कक्षा के थे तो कोण भी सही नहीं जानते थे) | वृत्त में ३६० डिग्री होते हैं, ये समझाना और फिर बताना कि पृथ्वी भी वृत्त में ही घूमती है अतः…
अध्याय 5 – ज्योतिष शास्त्र
अध्याय – ५ हमने अध्याय 1 के अंत में संक्षेप में लिखा था कि प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है | एक नक्षत्र13020| का होता है अतः नक्षत्र के एक चरण की दूरी 13020|/4 = 3020| होती है | सवा दो नक्षत्र अर्थात ९ चरण (300 ) की एक राशि होती है | चंद्रमा…
अध्याय 4 – ज्योतिष शास्त्र
जन्म कुंडली बनाने के साधन – जन्म कुंडली निम्नलिखित ३ साधनों से बनाई जा सकती है | 1. विभिन्न प्रकाशकों की Table of Ascendant के द्वारा जन्म के समय पृथ्वी की राशि (डिग्री) की गणना की जाती है | लग्न तालिका में इसे प्रथम भाव में लिखा जाता है तथा Table of Ephemeris के द्वारा…
अध्याय ३ – ज्योतिष शास्त्र
अध्याय ३ अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ अंगों से प्रत्यक्ष होना पड़ेगा | पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण, ये पांच अंग होते हैं इसीलिए इसे पंचांग कहा…