yog engineering

योग इंजीनियरिंग – Practical Yog

योग इंजीनियरिंग हमारे अंदर, बचपन से ही, कुछ बातें भरी जाती हैं या शायद हम उन बातों को सीख लेते हैं, जैसे कि अच्छा-ख़राब, सुन्दर-असुंदर, पाप-पुण्य, भला-बुरा, सही-गलत, अपना-पराया, मेरा-तेरा आदि | ये सब बातें, हमारे अंदर प्रोग्राम हो जाती हैं, हमारे चित्त में (शरीर के 24 तत्वों में से एक में) | हमारे जीवन…

Read More
bheeshm क्या शिखंडी सच में हिंजड़ा था ? क्यों परशुराम भीष्म को न जीत सके ?

क्या शिखंडी सच में हिंजड़ा था ? क्यों परशुराम भीष्म को न जीत सके ?

आज हम बात करेंगे, महाभारत से मेरी पसंदीदा कथा की | जब दुर्योधन पूछता है भीष्म से कि आप शिखंडी से युद्ध क्यों नहीं करना चाहते ? बहुत से लोग, जिन्होंने टीवी पर महाभारत देखी है, वो समझते हैं कि शिखंडी नपुंसक (हिजड़ा) था इसलिये भीष्म ने शिखंडी पर शस्त्र नहीं चलाया जबकि ये पूरी…

Read More
karm Vs Bhagya कर्म बड़ा या भाग्य - भाग 1

कर्म बड़ा या भाग्य – भाग 1

सभी लोग कभी न कभी कर्म और भाग्य की चर्चा करते हैं किन्तु वो चर्चा बहुधा सुनी सुनाई बातों पर ही आधारित होती है | वो कितनी शास्त्रोक्त है और क्या उस विषय की सम्यक विवेचना कहीं पर की जाती है | आम बोलचाल में तो नहीं | हमें कर्म और भाग्य के सम्बन्ध को…

Read More

रामजी का वनवास स्वीकार – सही या गलत ?

शास्त्र ज्ञान सीरिज में, आज दूसरा वीडियो, रामचंद्र जी के वनवास के बारे में | जब रामचंद्र जी को वनवास हुआ तो उन्होंने क्यों मान लिया ? यदि भरत को ही राजा बनाना था तो बंटवारा मांग लेते, जैसे युधिष्ठिर ने मांग लिया था | भरत भी राजा हो जाता और वनवास भी न जाना…

Read More

क्या पांडवों ने युद्ध में अधर्म किया था ?

जब गांधारी को पता चला की युधिष्ठिर उससे मिलने को आ रहे हैं तो वो रोषपूर्ण आवेग में आ जाती है और युधिष्ठिर को श्राप देने को उद्यत हो जाती है | वेदव्यास जी ये भांप लेते हैं और तुरंत गांधारी को रोक देते हैं कि हे गांधारी ! तुम युधिष्ठिर को श्राप नहीं दोगी…

Read More

राम ने वनवास ही क्यों चुना ? पांडवों की तरह अपना राज्य क्यों नहीं माँगा ?

रामायण में राम के वनवास का क्या मतलब है ! शास्त्रों को कैसे पढना चाहिए ! रामायण में राम की पितृ आज्ञा का पालन |

Read More

कैकयी को वरदान, सही या गलत ?

राजा दशरथ ने कैकयी के तीनों वचन क्यों माने ? नहीं मानते तो कैकयी क्या कर लेती ? ऐसी क्या मजबूरी थी दशरथ की, जो उसे कैकयी के तीनों वर मानने ही पड़े ? रामायण को कैसे पढ़ें ? शास्त्रों को कैसे पढ़ें ? अपने शास्त्रों को पढ़ें, हम नहीं पढेंगे तो कौन पढ़ेगा ?…

Read More

पापकर्मों के फल

धर्मदानकृतं सौख्यमधर्माद दुखःसंभवम् | तस्माधर्मं सुखार्थाय कुर्यात पापं विवर्जयेत || लोकद्वयेऽपि यत्सौख्यं तद्धर्मात्प्रोच्यते यतः | धर्म एव मर्ति कुर्यात सर्वकार्यातसिद्धये || मुहूर्तमपि जीवेद्धि नरः शुक्लेन कर्मणा | न कल्पमति जीवेश लोकद्वयविरोधिना ||                        – स्कन्द पुराण धर्मं और दान से सुख प्राप्त होता है और अधर्म से दुःख की उत्पत्ति होती है, अतः सुख के लिए…

Read More

अहम् ब्रह्मास्मि

क्रोधस्तु प्रथमं शत्रुर्निष्फलो देह्नाशनः, ज्ञानखड्गेन तं छित्वा परमं सुखमाप्नुयात | तृष्णा बहुविधा माया बन्धनी पापकारिणी, छित्वेतां ज्ञानखड्गेन सुखं तिष्ठति मानवः ||                                                — ब्रह्म पुराण अर्थ – मनुष्य का पहला शत्रु है क्रोध | उसका फल तो कुछ भी नहीं है, उलटे वह शरीर का नाश करता है, अतः ज्ञान रुपी खड्ग से उसका नाश…

Read More

जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया – ‘जीव कैसे उत्पन्न होता है ?’ कमठ ने कहा – ब्राह्मण ! पहले गुरु को, उसके बाद धर्म को नमस्कार करके मैं इस वेदवर्णित प्रश्न का यथाशक्ति समाधान करूँगा ! जीव के जन्म लेने…

Read More

You cannot copy content of this page