खंडन 6 – द्रौपदी के पांच पति नहीं थे, एक था युधिष्ठिर

खंडन 6 – द्रौपदी के पांच पति नहीं थे, एक था युधिष्ठिर (इस विषय पर लिखी गयी, यशपाल आर्य की पुस्तक का खंडन) वैसे तो मैं कभी किसी भी व्यक्ति, जो शास्त्र के नाम पर भ्रम फैलाता है, उससे वास्ता नहीं रखता पर इस पुस्तक के बारे में सर्च करने पर ज्ञात हुआ कि एक…

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खंडन 5 – द्रौपदी के पांच पति थे या एक ?

खंडन 5 : द्रौपदी के पांच ही पति थे , न कि एक पति युधिष्ठिर ! पोस्ट (युधिष्ठिर को ही द्रौपदी का एकमात्र पति कहने वाली, इस भ्रामक पोस्ट की डिटेल्स नीचे कमेन्ट में है) पोस्ट बनाने वाले ने, सर्वप्रथम अंग्रेजों के भाषांतरण को गलत बताते हुए, ब्राहमण, पुजारी, पुरोहित अदि को दोषी ठहराते हुए,…

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कथाओ में ज्योतिष !

श्रीमते विदुषे यूने कुलीनाय यशस्विने, उदाराय सनाथाय कन्या देय वराय वै | – १ एकतः पृथिवी कृत्स्ना सशैलवनकानन, स्वलन्कृतोपाधिहीना सुकन्या चैकतः स्मृता | विक्रीणीते यश्च कन्यामश्वम् वा गां तिलान्यपि || (विस्तार १६५ | ८ – १६ ) ब्रह्म पुराण अर्थ – ये सन्दर्भ तब का है जब सूर्य अपनी पुत्री विष्टि का विवाह नहीं कर…

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विवाह के वर का वर्णन

अत्यासन्ने चातिदूरे अत्यादशे धनवार्जिते । वृत्तिहीने च मूर्खे च कन्यादानं न शस्यते ।। मूढाय च विरलाय भारमसम्भाविताय च । आतुरे प्रमत्ताय कन्यादानं न कारयेत ।। सन्दर्भ – ये उस समय की बात है जब सती जी ने पुनर्जन्म लिया पार्वती जी के रूप में और शिव जी की घोर तपस्या कर के उन्हें प्रसन्न किया…

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