Category: धर्म
क्या युधिष्ठिर ने अधर्म किया था ?
युधिष्ठिर धर्मराज थे या अधर्मी, इसका निर्णय कैसे हो ? ये आक्षेप आजकल फेसबुक पर आम है कि युधिष्ठिर ने अपनी पत्नी को जुए में हारा, ये अधर्म किया फिर भी धर्मराज कहलाये । ये कहने वाले तमाम लोगों ने भले ही महाभारत का दशांश भी न पढा हो, महाभारत तो छोडिए किसी भी सनातन…
माता और पिता में से उत्तम कौन ?
पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि परमं तपः । पितरि प्रितिमापन्ने सर्वाः प्रोणन्ति देवताः ।। यह सन्दर्भ चिरकारी की कथा से लिया गया है जिसमें चिरकारी माता और पिता के महत्त्व को लेकर असमंजस में हैं । उनके पिता ने उन्हें अपनी माता का वध करने का आदेश दिया । क्योंकि वो चिरकारी थे अतः…
पाप प्रवृत्ति तो आश्चर्य का विषय है
परस्त्री सम्बन्ध पाप से क्या हानि मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।।अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान करने के लिए गए और जब उन्होंने पांच ग्राहों को श्राप मुक्त कराया और उन पांचो सुंदर स्त्रियों से ग्राह्स्वरूप में श्रापग्रस्त…
धर्माचरण में मृत्यु हो तो क्या होगा ?
धर्म के पालन में जीवन का मोह – उचित या अनुचित ? यज्जीवितं चाचिराम्शुसमानम क्षण्भंगुरम, तच्चेधर्मक्रते याति यातु दोषोअस्ती को ननु ।जीवितं च धनं दारा पुत्राः क्षेत्रं ग्रहाणी च, याति येषाम धर्मक्रेते त एव भुवि मानवाः ।। सन्दर्भ – एक बार अर्जुन बारह वर्षो के लिए तीर्थयात्रा के लिए निकले । वह मणिपुर होते हुए…
जीवन में श्रेष्ठ धर्म क्या है ?
धर्मे रागः श्रुतो चिंता दाने व्यसनमुत्तमम । इन्द्रियार्धेषु वैराग्यं संप्राप्तं जन्मनः फलम ।। सन्दर्भ – कात्यायन ने धर्म को समझने के लिए कठोर तप किया, जिस से आकाशवाणी हुई और उसने कहा की हे कात्यायन तुम पवित्र सरस्वती नदी के तट पर जा कर सारस्वत मुनि से मिलो । वे धर्म के तत्व् को जान…
दान की परिभाषा और प्रकार
दान को समझें और जाने कि दान क्या होता है ? द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः…
धर्म क्या है ?
जानें धर्म क्या होता है ? सनातन धर्म का असली अर्थ नेत्युवाच ततो वैश्यः सुखं धर्मे प्रतिष्ठितं | पापे दुखं भयं शोको दारिद्रयं क्लेश एव च |यतो धर्मस्ततो मुक्तिः स्वधर्मं किं विनश्यति | (१७०/२६) धर्ममेव परम् मन्ये यथेच्छसि तथा कुरु | ब्रह्मणाश्च गुरून देवान वेदान धर्मं जनार्दंनं ||यस्तु निन्द्यते पापो नासौ स्पृश्यते पापकृत् | उपेक्ष्णीयो…
खंडन 13 – विज्ञान और धर्म को तौलती हुई पोस्ट का खंडन
इस प्रकार की बहुत सी पोस्ट, कुछ ख़ास उद्देश्य से बनाई और वायरल की जाती हैं | जिनमें प्रमुख उद्देश्य होता है, आपको अपने धर्म से दूर करना | जब इस प्रकार की पोस्ट वायरल की जाती हैं तो 100 में से १ व्यक्ति अर्थात १% लोग, इसके प्रभाव में आ ही जाते हैं क्योंकि…
कैकयी को वरदान – सही या गलत ?
आज से एक नयी सिरीज प्रारंभ कर रहा हूँ | इसमें रोज शास्त्र ज्ञान का एक वीडियो शेयर करूँगा | शास्त्र ज्ञान के अभी तक करीब 44 सत्र हो चुके हैं और उनमें से 22 सत्रों तक के वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध हैं | ये वीडियो 15 -20 मिनट के वीडियो हैं, जिन्हें देखने में अधिक…
खंडन 11 – भगवान् को अस्तित्व को चुनौती देती वायरल पोस्ट का खंडन
खंडन 11 – भगवान् को अस्तित्व को चुनौती देती वायरल पोस्ट का खंडन आजकल इस प्रकार की पोस्ट, जिनमें ईश्वर की सत्ता को ही चुनौती दी जाती है,सोशल मिडिया पर खूब वायरल होती हैं | पर अगर वास्तव में, इनका थोडा भी विश्लेष्ण किया जाए तो पता चलता है कि ये पोस्ट, बहुत ही साधारण…