tark shastra 3.0 प्रत्यक्ष प्रमाण के भेद, बिना इन्द्रियों के भी प्रत्यक्ष ज्ञान कैसे संभव ?

प्रत्यक्ष प्रमाण के भेद, बिना इन्द्रियों के भी प्रत्यक्ष ज्ञान कैसे संभव ?

अमूमन लोग प्रत्यक्ष प्रमाण को ही सबसे बड़ा प्रमाण मानते हैं | प्रत्यक्ष अर्थात जो आँखों के सामने हो अथवा इन्द्रियों के सामने हो, उसे प्रत्यक्ष प्रमाण कहते हैं | पर क्या बिना इन्द्रियों के भी प्रत्यक्ष प्रमाण होता है ! क्या तर्कशास्त्र, बिना इन्द्रियों के जुड़े भी प्रमाण को मानता है ! जी हाँ…

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