धर्म क्या है ?

धर्म क्या है ?

जानें धर्म क्या होता है ? सनातन धर्म का असली अर्थ नेत्युवाच ततो वैश्यः सुखं धर्मे प्रतिष्ठितं | पापे दुखं भयं शोको दारिद्रयं क्लेश एव च |यतो धर्मस्ततो मुक्तिः स्वधर्मं किं विनश्यति | (१७०/२६) धर्ममेव परम् मन्ये यथेच्छसि तथा कुरु | ब्रह्मणाश्च गुरून देवान वेदान धर्मं जनार्दंनं ||यस्तु निन्द्यते पापो नासौ स्पृश्यते पापकृत् | उपेक्ष्णीयो…

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एक नाटक – यतो धर्मः ततो जयः

सनातन धर्म Vs हिन्दू (नाटक – यतो धर्मः ततो जयः) दो किरदार हैं, आप इन्हें राम और लक्ष्मण, जैसे टीवी में दिखाए गए थे, उनकी तरह से ले सकते हैं | दृश्य १ – हिन्दू – भैया, उधर से एक मुल्ला तलवार लिए आ रहा है | दूसरा हिन्दू – अरे, हमारे मोहल्ले पर हमला…

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भगवान् है या नहीं ?

बुद्धिश्च हायते पुंसां नाचैत्तगह समागमात | मध्यस्थेमध्यताम याति श्रेष्ठताम याति चौत्तमे || नारद जी कहते हैं – नन्दभद्र नाम का एक वणिक था | धर्मों के विषय में जो कुछ कहा गया है, उसमें कोई भी ऐसी बात नहीं थी, जो नन्दभद्र को ज्ञात न हो | किसी के साथ उसका द्वेष नहीं था, न…

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माता-पिता का महत्व

पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि  परमं तपः । पितरि प्रितिमापन्ने सर्वाः प्रोणन्ति देवताः ।। यह सन्दर्भ चिरकारी की कथा से लिया गया है जिसमें चिरकारी माता और पिता के महत्त्व को लेकर असमंजस में हैं । उनके पिता ने उन्हें अपनी माता का वध करने का आदेश दिया । क्योंकि वो चिरकारी थे अतः…

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दान की परिभाषा और प्रकार

द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन…

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संसार सृष्टि

मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।। अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान  करने के लिए गए और जब उन्होंने पांच ग्राहों को श्राप मुक्त कराया और उन पांचो सुंदर स्त्रियों से ग्राह्स्वरूप में श्रापग्रस्त होने का कारण पुछा तब…

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