Part 5 difference among Ahankar Abhiman and Ghamand अभिमान, घमंड और अहंकार By Pt Dr Ashok Sharma

अभिमान, घमंड और अहंकार By Pt Dr Ashok Sharma

प्रकृति तीन गुणों वाली होती है तो प्रकृति से बना सब कुछ भी तीन प्रकार का होगा | बहुधा, लोग अभिमान, घमंड और अहंकार – तीनो का एक ही अर्थ कर देते हैं लेकिन तीनों एक नहीं होते हैं | कोई भी दो शब्दों का अर्थ एक हो ही नहीं सकता है, जैसे चन्द्रमा को…

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Tark shastra तर्कशास्त्र - न्याय शास्त्र, प्रमाण क्या होता है ? प्रमा के भेद

तर्कशास्त्र – न्याय शास्त्र, प्रमाण क्या होता है ? प्रमा के भेद

बचपन में दसवीं कक्षा में, गणित में हम लोग प्रमेय सिद्ध करते थे, पर तब कभी ध्यान नहीं दिया कि ये प्रमेय शब्द का क्या अर्थ होता है ? वास्तव में हम गणित कर रहे होते थे, पर तर्कशास्त्र के अनुसार ! प्रमेय माने होता है, वो वाक्य, वो विषय, जिसे तर्क से सिद्ध करना…

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Geeta sar Part 3 Are we abusing God gifts ? What is Nimitta Matra with example by Dr Ashok Sharma

Are we abusing God gifts ? What is Nimitta Matra with example by Dr Ashok Sharma

ईश्वर ने विभिन्न तत्वों से ये मनुष्य बनाया | बाकी सभी योनियों यथा पेड़, पौधे आदि से हमें ज्यादा तत्व दिये पूरे 24 ! जानवरों में भी एक तत्व नहीं दिया – बुद्धि | केवल मनुष्य के पास ही वो दी लेकिन मनुष्य क्या कर रहा है ? जो भी ईश्वर प्रदत्त उपहार हैं, जो…

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Part 2 How English evolve from Hindi ? why no correct translation of Gita in market - Pt Ashok Sharma

How English evolve from Hindi ? why no correct translation of Gita in market – Pt Ashok Sharma

जब बात भगवद्गीता की होती है, तो लोगों को लगता है कि हमने पढ़कर समझ लिया है लेकिन ये इतना आसान नहीं है क्योंकि जो शब्दों के अर्थ किसी अनुवाद या पुस्तक में दिए हैं, उस एक शब्द के कितने अर्थ हो सकते हैं ? वो एक शब्द का कौन सा अर्थ उस अनुवाद में…

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soorya Gita – सूर्य गीता

    गौरनाद्यन्तवती सा जनित्री भूतभाविनी । सितासिता च रक्ता च सर्वकामदुधा विभोः ॥ ५॥  मान्त्रिकोपनिषत्     दानं स्वधर्मो नियमो यमश्च श्रुतं च कर्माणि च सद्‍व्रतानि । सर्वे मनोनिग्रहलक्षणान्ता: परो हि योगो मनस: समाधि: ॥ ११.२३ ४५ ॥ श्रीमद्भागवतपुराणम्    कर्माणि चित्तशुद्ध्यर्थं ऐकाग्र्यार्थमुपासना।  मोक्षार्थं ब्रह्मविज्ञानं इति वेदान्तडिण्डिमः।। २६।। वेदान्तडिण्डिमः    कर्मणा जायते भक्तिर्भक्त्या ज्ञानं प्रजायते । ज्ञानात्प्रजायते मुक्ति: इति शास्त्रेषु…

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बाबा रामदेव के ज्योतिष पर बयान पर शास्त्रज्ञान का मत

क्या बाबा रामदेव ने जो ज्योतिष के विषय में कहा है, वो सही है ? क्या सही में सभी ज्योतिषी लूटते हैं और क्या कला, मुहूर्त आदि सब बेकार की बातें हैं ? सब भगवान के हिसाब से ही हो रहा है तो क्या कला, मुहूर्त आदि का कोई महत्व नहीं है ? क्या सभी…

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एक नाटक – यतो धर्मः ततो जयः

सनातन धर्म Vs हिन्दू (नाटक – यतो धर्मः ततो जयः) दो किरदार हैं, आप इन्हें राम और लक्ष्मण, जैसे टीवी में दिखाए गए थे, उनकी तरह से ले सकते हैं | दृश्य १ – हिन्दू – भैया, उधर से एक मुल्ला तलवार लिए आ रहा है | दूसरा हिन्दू – अरे, हमारे मोहल्ले पर हमला…

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ब्राहमण की खोज के लिए नारद जी के बारह प्रश्न

मातृकाम को विजानाति कतिधा किद्रशक्षराम । पञ्चपंचाद्भुतम गेहं को विजानाति वा द्विजः ।। बहुरूपाम स्त्रियं कर्तुमेकरुपाम च वेत्ति कः । को वा चित्रकथं बन्धं वेत्ति संसारगोचरः ।। को वार्णव महाग्राहम वेत्ति विद्यापरायणः   । को वाष्टविधं ब्रह्मंयम वेत्ति ब्राह्मणसत्तमः ।। युगानाम च चतुर्णां वा को मूल दिवसान वदेत । चतुर्दशमनूनाम वा मूलवारम च वेत्ति कः ।। कस्मिश्चैव दिने…

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दान की परिभाषा और प्रकार

द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन…

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