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अभिनन्दन शर्मा, प्रसिद्ध उपन्यास सीरिज "अघोरी बाबा की गीता" के लेखक हैं | इन्होने अपनी इंजीनीयरिंग ग्वालियर के आईटीएम कॉलेज से सन 2005 में पूर्ण की | अभी ये गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में निवास करते हैं और दिल्ली में एक जापानी MNC में कार्यरत हैं |

शास्त्र – क्या सच, क्या झूठ, खंडन 3

रामायण पर भ्रामक पोस्ट का खंडन इस पोस्ट में निम्न दी गयी सोशल मिडिया वायरल पोस्ट, जिसमें रामायण से वानरों के बारे में तथ्यहीन बातें लिखी गयी हैं, उनका स्पष्टीकरण है | इस पोस्ट को फेसबुक पर किसी ‘महर्षि जाबाली’ ने लिखा है और उनकी पोस्ट का लिंक, नीचे कमेन्ट में दिया गया है |…

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अघोरी बाबा की गीता – भाग ५

अघोरी बाबा की गीता  इधर एक दिन कंपनी से आदेश हुआ कि गुवाहाटी जाओ और जैसा हर बार होता है, अपुन ने बोरिया बिस्तर बाँधा और पहुंच गए गुवाहाटी । गुवाहाटी मुझे बहुत पसंद है क्योंकि एक तो वहां पर बड़ा अच्छा मंदिर है सुक्रेश्वर महादेव मन्दिर और दूसरा मंदिर है उमानंदा मंदिर जो कि…

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अघोरी बाबा की गीता – भाग ४

अघोरी बाबा की गीता  एक बात बता, मैं इतना समझाता हूँ, उसके बाद भी तेरे प्रश्न ख़त्म नहीं होते ! लाता कहाँ से है इतने सवाल ? – बाबा ने आज डायरेक्टली ही पूछ लिया | आज बाबा ने वो बात पूछ ली, जिसे मैं बिना पूछे शायद किसी को भी नहीं बताता – बाबा,…

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अघोरी बाबा की गीता – ३

अघोरी बाबा की गीता  मेरा गुरु के बारे में टॉपिक चेंज करने का आईडिया सही बैठ गया और बाबा, अब थोड़ा गंभीर हो गए । क्या तुम्हें पता है, शंकराचार्य को उसके गुरु कैसे मिले ? तानसेन को उसके गुरु कैसे मिले ? सूरदास को उसके गुरु कैसे मिले ? – सवालों की झड़ी लगा…

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अघोरी बाबा की गीता – २

अघोरी की बाबा की गीता  जैसे ही मैंने श और ष में अंतर पूछा, बाबा का चेहरा झुझला गया | ओह ! तो अब क्या व्याकरण भी पढ़ाना पड़ेगा ? ऊपर की तरफ देखते हुए बाबा बोले – इसे गीता पढ़ानी थी ! इसे तो क ख ग भी सिखाना पड़ेगा पहले !!! अब फिर…

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banner अघोरी बाबा की गीता - भाग 1

अघोरी बाबा की गीता – भाग 1

  अघोरी बाबा की गीता रोजाना की तरह मैं अपने आफिस से घर जा रहा था । एक हाथ में स्टीयरिंग, एक हाथ मे मोबाइल और कार में भजन, जैसा रोज होता है । अचानक मेरे अवचेतन मस्तिष्क ने कार में जोरदार ब्रेक लगाये । सामने देखा तो एक बाबा, लंबी जटाओं वाले, भगवा कपड़े…

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भीम और बर्बरीक का युद्ध

मलं मूत्रं पुरीषं च श्लेष्मनिष्ठिवितं तथा, गण्डूषमप्सु मुञ्चन्ति ये ते ब्रह्मभिः समाः | अर्थ – जो जल में मल, मूत्र, विष्ठा, कफ, थूक और कुल्ला छोड़ते हैं, वे ब्रह्महत्यारों के सामान है | ये श्लोक उस समय का है, जब पांडव जुए में हार कर, जंगलो में घुमते हुए माँ चंडिका के दर्शन करके उस…

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ब्राहमण की खोज के लिए नारद जी के बारह प्रश्न

मातृकाम को विजानाति कतिधा किद्रशक्षराम । पञ्चपंचाद्भुतम गेहं को विजानाति वा द्विजः ।। बहुरूपाम स्त्रियं कर्तुमेकरुपाम च वेत्ति कः । को वा चित्रकथं बन्धं वेत्ति संसारगोचरः ।। को वार्णव महाग्राहम वेत्ति विद्यापरायणः   । को वाष्टविधं ब्रह्मंयम वेत्ति ब्राह्मणसत्तमः ।। युगानाम च चतुर्णां वा को मूल दिवसान वदेत । चतुर्दशमनूनाम वा मूलवारम च वेत्ति कः ।। कस्मिश्चैव दिने…

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दान की परिभाषा और प्रकार

द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन…

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माता-पिता का महत्व

पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि  परमं तपः । पितरि प्रितिमापन्ने सर्वाः प्रोणन्ति देवताः ।। यह सन्दर्भ चिरकारी की कथा से लिया गया है जिसमें चिरकारी माता और पिता के महत्त्व को लेकर असमंजस में हैं । उनके पिता ने उन्हें अपनी माता का वध करने का आदेश दिया । क्योंकि वो चिरकारी थे अतः…

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