ब्रह्माण्ड और पृथ्वी की परिकल्पना

स्कन्द जी ने अर्जुन को ब्रह्माण्ड के बारे में ऐसा कहा है कुंतीनंदन ! सृष्टि से पहले यहाँ सब कुछ अव्यक्त एवं प्रकाश शून्य था । उस अव्याकृत अवस्था में प्रकृति और पुरुष – ये दो अजन्मा (जन्मरहित) एक दूसरे से मिल कर एक हुए, यह हम सुना करते हैं । तत्पश्चात अपने स्वरूपभूत स्वभाव …

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भगवान् शिव की पूजा और फल

 यह सन्दर्भ तब का है जब कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया किन्तु यह सोच कर दुखी होने लगे कि मैंने शिव भक्त का वध किया अतः इस शोक से निकलने के लिए मुझे प्रायश्चित करना चाहिए । भगवान् विष्णु ने तब कार्तिकेय को नाना प्रकार से समझाया किन्तु वे नहीं माने तब भगवान् विष्णु…

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माता-पिता का महत्व

पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता हि  परमं तपः । पितरि प्रितिमापन्ने सर्वाः प्रोणन्ति देवताः ।। यह सन्दर्भ चिरकारी की कथा से लिया गया है जिसमें चिरकारी माता और पिता के महत्त्व को लेकर असमंजस में हैं । उनके पिता ने उन्हें अपनी माता का वध करने का आदेश दिया । क्योंकि वो चिरकारी थे अतः…

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नारद जी के समस्त प्रश्नों का समाधान

8. चौदह मनुओं के मूल दिवस का किसको ज्ञान है ? ये युगादि तिथियाँ बताई गयी हैं, अब मन्वन्तर की प्रारंभिक तिथियों का श्रवण कीजिये । अश्विन शुक्ल नवमी, कार्तिक की द्वादशी, चैत्र और भाद्र की तृतीया, फाल्गुन की अमावस्या, पौष की एकादशी, आषाढ़ की पूर्णिमा, कार्तिक की पूर्णिमा, फाल्गुन, चैत्र और ज्येष्ठ की पूर्णिमा…

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ब्राह्मण के प्रकार – नारद जी के छठे एवं सातवें प्रश्न का उत्तर

किस श्रेष्ठ ब्राह्मण को आठ प्रकार के ब्राह्मणत्त्व का ज्ञान है ? विप्रवर !  अब आप ब्राह्मण के आठ भेदों का वर्णन सुने – मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि – ये आठ प्रकार के ब्राह्मण श्रुति में पहले बताये गए हैं । इनमें विद्या और सदाचार की विशेषता से पूर्व पूर्व…

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नारद जी के दुसरे से पंचम प्रश्न का उत्तर

2. कौन द्विज पचीस वस्तुओं के बने हुए गृह को अच्छी तरह जानता है ? अब पच्चीस वस्तुओं से बने हुए गृह सम्बन्धी द्वितीय प्रश्न का उत्तर सुनिये । पांच महाभूत (पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश), पांच कर्मेन्द्रिय (वाक्, हाथ, पैर, गुदा और लिंग), पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ (कान, नेत्र, रसना, नासिक और त्वचा), पाँच विषय…

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नारद जी के पहले प्रश्न का उत्तर

मन में अपने बारह प्रश्नों को लेकर ब्राह्मण की खोज के लिए नारद जी कलाप ग्राम पहुचे । कलाप ग्राम वह स्थान है, जहां सतयुग के लिए सूर्य वंश, चन्द्र वंश और ब्राह्मण वंश के बीज सुरक्षित हैं । वहां जा कर मैंने ब्राह्मणों से अपने प्रश्नों के समाधान के लिए कहा । वहां के विद्वान ब्राहमण…

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ब्राहमण की खोज के लिए नारद जी के बारह प्रश्न

मातृकाम को विजानाति कतिधा किद्रशक्षराम । पञ्चपंचाद्भुतम गेहं को विजानाति वा द्विजः ।। बहुरूपाम स्त्रियं कर्तुमेकरुपाम च वेत्ति कः । को वा चित्रकथं बन्धं वेत्ति संसारगोचरः ।। को वार्णव महाग्राहम वेत्ति विद्यापरायणः   । को वाष्टविधं ब्रह्मंयम वेत्ति ब्राह्मणसत्तमः ।। युगानाम च चतुर्णां वा को मूल दिवसान वदेत । चतुर्दशमनूनाम वा मूलवारम च वेत्ति कः ।। कस्मिश्चैव दिने…

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दान की परिभाषा और प्रकार

द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन…

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