शिव और कालभीति सम्वाद

शिव और कालभीति सम्वाद

सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के आधार पर भी वर्गीकरण हो सकता है | ऐसा हम कभी नहीं सोचते | वर्गीकरण, विभिन्न गुणों के आधार पर होता है, अध्ययन किया जाता है किन्तु मनुष्य का वर्गीकरण, सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के आधार पर क्यों नहीं किया जा सकता है ? कैसे एक आदमी दुसरे आदमी से…

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खंडन 18 – ब्रह्मा और सरस्वती जी के बारे में वायरल पोस्ट का खंडन

खंडन 18 – ब्रह्मा और सरस्वती जी के बारे में वायरल पोस्ट का खंडन हमें शास्त्र – क्या सच, क्या झूठ ग्रुप में इस बार ब्रह्मा जी और सरस्वती जी के बारे में एक कथा भेजी गयी, जिसमें कि कहा गया है कि ब्रह्मा जी ने अपनी ही पुत्री से विवाह किया और ब्रह्मा और…

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श्राद्ध

श्राद्ध में चढ़ाए पिंड और जल को पूर्वज कैसे ग्रहण करते हैं ?

श्राद्ध के विषय में, नारद जी और अर्जुन का संवाद नारद जी कहते हैं – अर्जुन ! इसके बाद राजा करन्धम ने महाकाल से पूछा – भगवन ! मेरे मन में सदा ये संशय रहता है की मनुष्यों द्वारा पितरों का जो तर्पण किया जाता है, उसमें जल तो जल में ही चला जाता है;…

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“मैं पानी में हूँ, पर गीला नहीं हूँ |”

यस्याज्ञया जगतस्रष्टा विरंचिः पालको हरिः | संहर्ता कालरुद्राख्यो नमस्तस्यै पिनाकिने || —- स्कन्द पुराण अर्थ – जिनकी आज्ञा से ब्रह्मा जी इस जगत की सृष्टि तथा विष्णु भगवान् पालन करते हैं और जो स्वयं ही कालरूद्र नाम धारण करके इस विश्व का संहार करते हैं, उन पिनाकधारी भगवान् शंकर को नमस्कार है | अंतर्ध्यान –…

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कलियुग का भविष्य कथन

राजन ! अट्ठाइसवें कलियुग में जो कुछ होने वाला है, उसे सुनो ! कलियुग के तीन हजार दो सौ नब्बे वर्ष व्यतीत होने पर इस भूमंडल में वीरों का अधिपति शूद्रक नामका राजा होगा, जो चर्चिता नगरी में आराधना करके सिद्धि प्राप्त करेगा | शूद्रक पृथ्वी का भार उतारने वाला राजा होगा | तदनन्तर कलियुग…

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ब्रह्माण्ड और पृथ्वी की परिकल्पना

स्कन्द जी ने अर्जुन को ब्रह्माण्ड के बारे में ऐसा कहा है कुंतीनंदन ! सृष्टि से पहले यहाँ सब कुछ अव्यक्त एवं प्रकाश शून्य था । उस अव्याकृत अवस्था में प्रकृति और पुरुष – ये दो अजन्मा (जन्मरहित) एक दूसरे से मिल कर एक हुए, यह हम सुना करते हैं । तत्पश्चात अपने स्वरूपभूत स्वभाव …

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