अघोरी बाबा की गीता aghori baba ki gita

अघोरी बाबा की गीता – 129

अघोरी बाबा की गीता : बाहर से भीतर की ओर….. आशा है, अब तुम मन, बुद्धि और चित्त में स्पष्ट हो गए होगे और ये किस प्रकार और क्या क्या कार्य करते हैं, इसे समझ गये होगे ! – बाबा ने मुझे तौलने की दृष्टि से देखा कि मेरी मोटी बुद्धि में क्या घुसा और…

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