नवग्रहों की स्थिति एवं विभिन्न पातालों का वर्णन
नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! भूमि से लाख योजन ऊपर सूर्य मंडल है । भगवान् सूर्य के रथ का विस्तार नौ सहस्त्र योजन है । इसकी धुरी डेढ़ करोड़ साढ़े सात लाख योजन की है । वेद के जो सात छंद हैं वे ही सूर्य के रथ के सात अश्व हैं । उनके नाम सुनो –…