युद्ध फल

सन्दर्भ – जब इंद्र का युद्ध वृत्तासुर से प्रारंभ हुआ और देवताओं ने दधिची की हड्डियों से बनाये हुए अस्त्र शस्त्रों से दैत्यों का नाश करना प्राम्भ कर दिया तब सभी राक्षस भयभीत हो कर भागने लगे । तब वृत्तासुर ने समझाया “वीरो ! युद्ध स्वर्ग का द्वार है, उसका त्याग कदापि नहीं करना चाहिए…

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प्रदोष व्रत एवं शिव पूजा

सन्दर्भ – ये उस समय की बात  है जब विश्वकर्मा ने इंद्र से बदला लेने के लिए कठोर तप कर के ब्रह्मा जी से वृत्तासुर नामक पुत्र का  आशीर्वाद लिया । वह असुर प्रतिदिन सौ धनुष (चार सौ हाथ) बढ़ता था । उसने सम्पूर्ण भूमंडल ढक लिया और इंद्र को युद्ध  के लिए ललकारने लगा । तिस…

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ब्रह्म हत्या

धर्मो हि मह्ताभेष शरणागतपालनम । शरणागतम च विप्रं च रोगिणं वृद्धमेव च ।। सन्दर्भ – यह उक्ति उस समय की है जब इंद्र बलि के पास समुन्द्र मंथन का प्रस्ताव ले कर जाते हैं । क्योंकि बलि राक्षसराज थे और उनका देवताओ से बैर था अतः वह इंद्र से मिलने के लिए भी अग्रसर नहीं…

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उद्देश्य

इस ब्लॉग का उद्देश्य शास्त्रों के ज्ञान का प्रसार और सर्व साधारण को अपने शास्त्रों और वेदों की नीतियों से अवगत करना है । मैंने अभी कुछ समय पूर्व ही यथासंभव कुछ पुस्तकों का अध्ययन करना प्रारंभ किया है और ये निर्धारित किया है की जो कुछ भी मैं पढूंगा उसको सभी पाठको की सेवा…

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