Tag: स्कंध पुराण
प्रदोष व्रत एवं शिव पूजा
सन्दर्भ – ये उस समय की बात है जब विश्वकर्मा ने इंद्र से बदला लेने के लिए कठोर तप कर के ब्रह्मा जी से वृत्तासुर नामक पुत्र का आशीर्वाद लिया । वह असुर प्रतिदिन सौ धनुष (चार सौ हाथ) बढ़ता था । उसने सम्पूर्ण भूमंडल ढक लिया और इंद्र को युद्ध के लिए ललकारने लगा । तिस…
ब्रह्म हत्या
धर्मो हि मह्ताभेष शरणागतपालनम । शरणागतम च विप्रं च रोगिणं वृद्धमेव च ।। सन्दर्भ – यह उक्ति उस समय की है जब इंद्र बलि के पास समुन्द्र मंथन का प्रस्ताव ले कर जाते हैं । क्योंकि बलि राक्षसराज थे और उनका देवताओ से बैर था अतः वह इंद्र से मिलने के लिए भी अग्रसर नहीं…