soorya Gita – सूर्य गीता

    गौरनाद्यन्तवती सा जनित्री भूतभाविनी । सितासिता च रक्ता च सर्वकामदुधा विभोः ॥ ५॥  मान्त्रिकोपनिषत्     दानं स्वधर्मो नियमो यमश्च श्रुतं च कर्माणि च सद्‍व्रतानि । सर्वे मनोनिग्रहलक्षणान्ता: परो हि योगो मनस: समाधि: ॥ ११.२३ ४५ ॥ श्रीमद्भागवतपुराणम्    कर्माणि चित्तशुद्ध्यर्थं ऐकाग्र्यार्थमुपासना।  मोक्षार्थं ब्रह्मविज्ञानं इति वेदान्तडिण्डिमः।। २६।। वेदान्तडिण्डिमः    कर्मणा जायते भक्तिर्भक्त्या ज्ञानं प्रजायते । ज्ञानात्प्रजायते मुक्ति: इति शास्त्रेषु…

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कथाओ में ज्योतिष !

श्रीमते विदुषे यूने कुलीनाय यशस्विने, उदाराय सनाथाय कन्या देय वराय वै | – १ एकतः पृथिवी कृत्स्ना सशैलवनकानन, स्वलन्कृतोपाधिहीना सुकन्या चैकतः स्मृता | विक्रीणीते यश्च कन्यामश्वम् वा गां तिलान्यपि || (विस्तार १६५ | ८ – १६ ) ब्रह्म पुराण अर्थ – ये सन्दर्भ तब का है जब सूर्य अपनी पुत्री विष्टि का विवाह नहीं कर…

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नारद जी के समस्त प्रश्नों का समाधान

8. चौदह मनुओं के मूल दिवस का किसको ज्ञान है ? ये युगादि तिथियाँ बताई गयी हैं, अब मन्वन्तर की प्रारंभिक तिथियों का श्रवण कीजिये । अश्विन शुक्ल नवमी, कार्तिक की द्वादशी, चैत्र और भाद्र की तृतीया, फाल्गुन की अमावस्या, पौष की एकादशी, आषाढ़ की पूर्णिमा, कार्तिक की पूर्णिमा, फाल्गुन, चैत्र और ज्येष्ठ की पूर्णिमा…

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