mohini राजा रुक्मांगद और रानी मोहिनी की कथा - सत्य की रक्षा और वचनपालन

राजा रुक्मांगद और रानी मोहिनी की कथा – सत्य की रक्षा और वचनपालन

क्या कैकयी से भी कोई निष्ठुर रानी थी ? कैकयी ने तो पुत्र मोह में अपने पुत्र का राज्यभिषेक और राम को वनवास माँगा था पर क्या कोई ऐसी भी रानी थी, जिसने अपने ही पति के पुत्र का वध ही वचन में मांग लिया था ? वो भी उसके ही पिता के द्वारा ?…

Read More

योग – 1

अर्जुन बोले – मैं योग के स्वरुप का तात्विक विवेचन सुनना चाहता हूँ | क्योंकि योग को समस्त उत्तम साधनों से भी उत्तम बताकर सब लोग उसकी बड़ी प्रशंसा करते हैं | नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! मैं संक्षेप से ही तुम्हें योग का तत्व बतलाता हूँ | इसके सुनने से भी चित्त…

Read More

You cannot copy content of this page