नवग्रहों की स्थिति एवं विभिन्न पातालों का वर्णन

नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! भूमि से लाख योजन ऊपर सूर्य मंडल है । भगवान् सूर्य के रथ का विस्तार नौ सहस्त्र योजन है । इसकी धुरी डेढ़ करोड़ साढ़े सात लाख योजन की है । वेद  के जो सात छंद हैं वे ही सूर्य के रथ के सात अश्व हैं । उनके नाम सुनो –…

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नारद जी के पहले प्रश्न का उत्तर

मन में अपने बारह प्रश्नों को लेकर ब्राह्मण की खोज के लिए नारद जी कलाप ग्राम पहुचे । कलाप ग्राम वह स्थान है, जहां सतयुग के लिए सूर्य वंश, चन्द्र वंश और ब्राह्मण वंश के बीज सुरक्षित हैं । वहां जा कर मैंने ब्राह्मणों से अपने प्रश्नों के समाधान के लिए कहा । वहां के विद्वान ब्राहमण…

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