ज्योतिष शास्त्र – अध्याय 1

पहले ये वीडियो देखें, फिर आगे पढ़ें | लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः |स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते || अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है | यह भी दो प्रकार का होता है (१) स्थूल और (२) सूक्ष्म | स्थूल…

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अध्याय 5 – ज्योतिष शास्त्र

अध्याय – ५ हमने अध्याय 1 के अंत में संक्षेप में लिखा था कि प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है | एक नक्षत्र13020| का होता है अतः नक्षत्र के एक चरण की दूरी 13020|/4 = 3020| होती है | सवा दो नक्षत्र अर्थात ९ चरण (300 ) की एक राशि होती है | चंद्रमा…

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