Tag: ज्ञानेन्द्रियाँ
कर्मेन्द्रियाँ और ज्ञानेन्द्रियाँ क्या हैं ? – योग 2
योग – 2 पहले भाग में बताया था कि योग मतलब जोड़ना (भाग १) | अंदर से बाहर को जोड़ना ही योग है | जब हम पार्क में कुछ करने जाते हैं तो यदि हम अंदर से बाहर को नहीं जोड़ रहे हैं, तो वो कुछ भी हो सकता है, पर योग नहीं हो सकता…
ज्ञानेन्द्रियाँ क्या हैं और कर्मेन्द्रियाँ क्या ? – योग 2
योग – 2 पहले भाग में बताया था कि योग मतलब जोड़ना (भाग १) | अंदर से बाहर को जोड़ना ही योग है | जब हम पार्क में कुछ करने जाते हैं तो यदि हम अंदर से बाहर को नहीं जोड़ रहे हैं, तो वो कुछ भी हो सकता है, पर योग नहीं हो सकता…
ब्रह्माण्ड और पृथ्वी की परिकल्पना
स्कन्द जी ने अर्जुन को ब्रह्माण्ड के बारे में ऐसा कहा है कुंतीनंदन ! सृष्टि से पहले यहाँ सब कुछ अव्यक्त एवं प्रकाश शून्य था । उस अव्याकृत अवस्था में प्रकृति और पुरुष – ये दो अजन्मा (जन्मरहित) एक दूसरे से मिल कर एक हुए, यह हम सुना करते हैं । तत्पश्चात अपने स्वरूपभूत स्वभाव …