गीता के पहले श्लोक का गूढ़ अर्थ और त्रिगुणात्मकः प्रकृतिः का क्या अर्थ है ?
हम बहुत सी बातें सुनते हैं, जैसे कि त्रिगुणात्मकः प्रकृतिः पर क्या हम उन बातों की गूढ़ता को समझते भी हैं ? क्या अर्थ है, इस छोटी सी पंक्ति का ? प्रकृति त्रिगुण वाली कैसे है ? कहीं कोई व्याख्या तो अवश्य होगी, क्या है वो ? ऐसे ही गीता को सब पढते हैं, पर…