गीता के पहले श्लोक का अर्थ

गीता के पहले श्लोक का गूढ़ अर्थ और त्रिगुणात्मकः प्रकृतिः का क्या अर्थ है ?

हम बहुत सी बातें सुनते हैं, जैसे कि त्रिगुणात्मकः प्रकृतिः पर क्या हम उन बातों की गूढ़ता को समझते भी हैं ? क्या अर्थ है, इस छोटी सी पंक्ति का ? प्रकृति त्रिगुण वाली कैसे है ? कहीं कोई व्याख्या तो अवश्य होगी, क्या है वो ? ऐसे ही गीता को सब पढते हैं, पर…

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चिंता से मुक्ति

चिंता से मुक्ति कैसे पाएं, आसान उपाय – #शास्त्रज्ञान

मनुष्य जीवित है तो चिंता अवश्य होगी ! ऐसा कोई मनुष्य नहीं हो सकता, जिसे चिंता नहीं होती हो लेकिन चिंता ही, यदि सही से हैंडल न की जाए अवसाद बन जाती है, जिसे हम स्ट्रेस के नाम से भी जानते हैं | यही स्ट्रेस यदि बढ़ जाए, तो व्यक्ति आत्महत्या तक के प्रयास कर…

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ज्ञान किसको प्राप्त होता है और किसको नहीं ?

विकार शब्द का अर्थ क्या होता है ? हम समझते हैं विकार शब्द मतलब कोई खराब चीज पर ऐसा नहीं है ! मनोविकार का अर्थ मन की गंदगी नहीं है | विकार का अर्थ है, कुछ नया ! माता से बच्चा हुआ, ये माता का विकार है क्योंकि वो माता से उत्पन्न होता है, पर…

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Part 5 difference among Ahankar Abhiman and Ghamand 1 अहंकार, अभिमान और घमंड में क्या अंतर है ?

अहंकार, अभिमान और घमंड में क्या अंतर है ?

प्रकृति तीन गुणों वाली होती है तो प्रकृति से बना सब कुछ भी तीन प्रकार का होगा | बहुधा, लोग अभिमान, घमंड और अहंकार – तीनो का एक ही अर्थ कर देते हैं लेकिन तीनों एक नहीं होते हैं | कोई भी दो शब्दों का अर्थ एक हो ही नहीं सकता है, जैसे चन्द्रमा को…

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Part 5 difference among Ahankar Abhiman and Ghamand अहंकार, अभिमान और घमंड में क्या अंतर है ?

अहंकार, अभिमान और घमंड में क्या अंतर है ?

प्रकृति तीन गुणों वाली होती है तो प्रकृति से बना सब कुछ भी तीन प्रकार का होगा | बहुधा, लोग अभिमान, घमंड और अहंकार – तीनो का एक ही अर्थ कर देते हैं लेकिन तीनों एक नहीं होते हैं | कोई भी दो शब्दों का अर्थ एक हो ही नहीं सकता है, जैसे चन्द्रमा को…

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soorya Gita – सूर्य गीता

    गौरनाद्यन्तवती सा जनित्री भूतभाविनी । सितासिता च रक्ता च सर्वकामदुधा विभोः ॥ ५॥  मान्त्रिकोपनिषत्     दानं स्वधर्मो नियमो यमश्च श्रुतं च कर्माणि च सद्‍व्रतानि । सर्वे मनोनिग्रहलक्षणान्ता: परो हि योगो मनस: समाधि: ॥ ११.२३ ४५ ॥ श्रीमद्भागवतपुराणम्    कर्माणि चित्तशुद्ध्यर्थं ऐकाग्र्यार्थमुपासना।  मोक्षार्थं ब्रह्मविज्ञानं इति वेदान्तडिण्डिमः।। २६।। वेदान्तडिण्डिमः    कर्मणा जायते भक्तिर्भक्त्या ज्ञानं प्रजायते । ज्ञानात्प्रजायते मुक्ति: इति शास्त्रेषु…

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अघोरी बाबा की गीता aghori baba ki gita

अघोरी बाबा की गीता – 129

अघोरी बाबा की गीता : बाहर से भीतर की ओर….. आशा है, अब तुम मन, बुद्धि और चित्त में स्पष्ट हो गए होगे और ये किस प्रकार और क्या क्या कार्य करते हैं, इसे समझ गये होगे ! – बाबा ने मुझे तौलने की दृष्टि से देखा कि मेरी मोटी बुद्धि में क्या घुसा और…

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अहिंसा क्या है ?

“अहिंसा परमो धर्मः”1 अंतर्ध्यान – अंहिंसा क्या है ? अहिंसा का एक साधारण अर्थ जो हमें बताया जाता है – “हिंसा न करना” ही अहिंसा है | हिंसा नहीं करनी चाहिए क्योंकि हिंसा करना पाप है जबकि अहिंसा परम धर्म है | क्या सही में अहिंसा का वही अर्थ है जो हमें बताया जा रहा है,…

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