अध्याय ३ – ज्योतिष शास्त्र

अध्याय ३ अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ अंगों से प्रत्यक्ष होना पड़ेगा | पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण, ये पांच अंग होते हैं इसीलिए इसे पंचांग कहा…

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ज्योतिष अध्याय 1

ज्योतिष अध्ययन पहले ये वीडियो देखें, फिर आगे पढ़ें | लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः |स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते || अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है | यह भी दो प्रकार का होता है (१) स्थूल और (२) सूक्ष्म…

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नारद जी के समस्त प्रश्नों का समाधान

8. चौदह मनुओं के मूल दिवस का किसको ज्ञान है ? ये युगादि तिथियाँ बताई गयी हैं, अब मन्वन्तर की प्रारंभिक तिथियों का श्रवण कीजिये । अश्विन शुक्ल नवमी, कार्तिक की द्वादशी, चैत्र और भाद्र की तृतीया, फाल्गुन की अमावस्या, पौष की एकादशी, आषाढ़ की पूर्णिमा, कार्तिक की पूर्णिमा, फाल्गुन, चैत्र और ज्येष्ठ की पूर्णिमा…

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