कमठ द्वारा शरीर वर्णन

भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे बताओ | कमठ ने कहा – विप्रवर ! जैसा यह ब्रह्माण्ड है, वैसा ही यह शरीर भी बताया गया है | पैरों का…

Read More

अहिंसा क्या है ?

“अहिंसा परमो धर्मः”1 अंतर्ध्यान – अंहिंसा क्या है ? अहिंसा का एक साधारण अर्थ जो हमें बताया जाता है – “हिंसा न करना” ही अहिंसा है | हिंसा नहीं करनी चाहिए क्योंकि हिंसा करना पाप है जबकि अहिंसा परम धर्म है | क्या सही में अहिंसा का वही अर्थ है जो हमें बताया जा रहा है,…

Read More

अध्याय 4 – ज्योतिष शास्त्र

जन्म कुंडली बनाने के साधन – जन्म कुंडली निम्नलिखित ३ साधनों से बनाई जा सकती है | 1. विभिन्न प्रकाशकों की Table of Ascendant के द्वारा जन्म के समय पृथ्वी की राशि (डिग्री) की गणना की जाती है | लग्न तालिका में इसे प्रथम भाव में लिखा जाता है तथा Table of Ephemeris के द्वारा…

Read More

जीव कैसे उत्पन्न होता है ?

कमठ की यह महत्वपूर्ण बात सुनकर अतिथि ब्राह्मण ने मन ही मन उसकी सराहना की और यह प्रश्न उपस्थित किया – ‘जीव कैसे उत्पन्न होता है ?’ कमठ ने कहा – ब्राह्मण ! पहले गुरु को, उसके बाद धर्म को नमस्कार करके मैं इस वेदवर्णित प्रश्न का यथाशक्ति समाधान करूँगा ! जीव के जन्म लेने…

Read More

अध्याय ३ – ज्योतिष शास्त्र

अध्याय ३ अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ अंगों से प्रत्यक्ष होना पड़ेगा | पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण, ये पांच अंग होते हैं इसीलिए इसे पंचांग कहा…

Read More

जीवन के संदेहों का निवारण

शोकस्थान शस्त्राणी हर्ष स्थानि शतानि च | दिवसे दिवसे मूढ़माविशन्ति न पंडितम || अर्थात – मूर्ख मनुष्य को ही प्रतिदिन शोक के सहस्त्रों और हर्ष के सैकड़ो स्थान प्राप्त होते हैं, विद्वान पुरुष को नहीं | नारद जी कहते हैं – तदनन्तर परम बुद्धिमान नंदभद्र बहूदक कुण्ड के तट पर वर्तमान कपिलेश्वर लिंग की पूजा…

Read More

अध्याय 2

ज्योतिष सीखें, आसान शब्दों में योजनानि शतान्यष्टो भूकर्णों द्विगुणानि तु |तद्वर्गतो दशगुणात्पदे भूपरिधिर्भवते || अर्थात पृथ्वी का व्यास 800 के दूने 1600 योजन है, इसके वर्ग का 10 गुना करके गुणनफल का वर्गमूल निकालने से जो आता है, वह पृथ्वी कि परिधि है | इस श्लोक को विस्तार से आगे चर्चा करेंगे किन्तु इस श्लोक…

Read More

कलियुग का भविष्य कथन

राजन ! अट्ठाइसवें कलियुग में जो कुछ होने वाला है, उसे सुनो ! कलियुग के तीन हजार दो सौ नब्बे वर्ष व्यतीत होने पर इस भूमंडल में वीरों का अधिपति शूद्रक नामका राजा होगा, जो चर्चिता नगरी में आराधना करके सिद्धि प्राप्त करेगा | शूद्रक पृथ्वी का भार उतारने वाला राजा होगा | तदनन्तर कलियुग…

Read More

कलियुग की प्रवृत्ति का वर्णन

कलेर्दोषेनिवेश्चैव शृणु चैकं महागुणं | यदल्पेन तु कालेन सिद्धि गच्छति मानवाः || (1) त्रेतायां वार्षिको धर्मो द्वापरे मासिकः स्मृतः | यथा क्लेशं वरन प्राश्स्तहा प्राप्यते कलौ ||  (2) दुगत्रयेण तावन्तः सिद्धि गच्छन्ति पार्थिव | यावन्तः सिद्धिमाद्यन्ति कलौ हरिहर्व्रताः || (3) अब कलियुग की प्रवृत्ति सुनो | कलियुग में तमोगुण से व्याकुल इन्द्रियों वाले मनुष्य माया,…

Read More

काल का मान

अब मैं तुमसे काल का मान बताऊंगा, उसे सुनो – विद्वान लोग पंद्रह निमेष की एक ‘काष्ठा’ बताते हैं । तीस काष्ठा की एक ‘कला’ गिननी चाहिए । तीस कला का एक ‘मुहूर्त’ होता है । तीस मुहूर्त के एक ‘दिन-रात’ होते हैं । एक दिन में तीन तीन मुहूर्त वाले पांच काल होते है,…

Read More

You cannot copy content of this page