नारद जी के दुसरे से पंचम प्रश्न का उत्तर

2. कौन द्विज पचीस वस्तुओं के बने हुए गृह को अच्छी तरह जानता है ? अब पच्चीस वस्तुओं से बने हुए गृह सम्बन्धी द्वितीय प्रश्न का उत्तर सुनिये । पांच महाभूत (पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश), पांच कर्मेन्द्रिय (वाक्, हाथ, पैर, गुदा और लिंग), पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ (कान, नेत्र, रसना, नासिक और त्वचा), पाँच विषय…

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नारद जी के पहले प्रश्न का उत्तर

मन में अपने बारह प्रश्नों को लेकर ब्राह्मण की खोज के लिए नारद जी कलाप ग्राम पहुचे । कलाप ग्राम वह स्थान है, जहां सतयुग के लिए सूर्य वंश, चन्द्र वंश और ब्राह्मण वंश के बीज सुरक्षित हैं । वहां जा कर मैंने ब्राह्मणों से अपने प्रश्नों के समाधान के लिए कहा । वहां के विद्वान ब्राहमण…

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ब्राहमण की खोज के लिए नारद जी के बारह प्रश्न

मातृकाम को विजानाति कतिधा किद्रशक्षराम । पञ्चपंचाद्भुतम गेहं को विजानाति वा द्विजः ।। बहुरूपाम स्त्रियं कर्तुमेकरुपाम च वेत्ति कः । को वा चित्रकथं बन्धं वेत्ति संसारगोचरः ।। को वार्णव महाग्राहम वेत्ति विद्यापरायणः   । को वाष्टविधं ब्रह्मंयम वेत्ति ब्राह्मणसत्तमः ।। युगानाम च चतुर्णां वा को मूल दिवसान वदेत । चतुर्दशमनूनाम वा मूलवारम च वेत्ति कः ।। कस्मिश्चैव दिने…

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दान की परिभाषा और प्रकार

द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन…

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संसार सृष्टि

मस्तकस्थापिनम मृत्युम यदि पश्येदयम जनः । आहारोअपि न रोचते किमुताकार्यकारिता ।। अहो मानुष्यकं जन्म सर्वरत्नसुदुर्लभम । तृणवत क्रियते कैश्चिद योषिन्मूढ़ेर्नराधमै ।। सन्दर्भ – जब अर्जुन पांच तीर्थों में स्नान  करने के लिए गए और जब उन्होंने पांच ग्राहों को श्राप मुक्त कराया और उन पांचो सुंदर स्त्रियों से ग्राह्स्वरूप में श्रापग्रस्त होने का कारण पुछा तब…

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धर्माचारण में मृत्यु

यज्जीवितं चाचिराम्शुसमानम क्षण्भंगुरम, तच्चेधर्मक्रते याति यातु दोषोअस्ती को ननु । जीवितं च धनं दारा पुत्राः क्षेत्रं ग्रहाणी च, याति येषाम धर्मक्रेते त एव भुवि मानवाः ।। सन्दर्भ – एक बार अर्जुन बारह वर्षो के लिए तीर्थयात्रा के लिए निकले । वह मणिपुर होते हुए वहां के पांच तीर्थो में स्नान करने के लिए आये ।…

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मनुष्य जन्म का सार

धर्मे रागः श्रुतो चिंता दाने व्यसनमुत्तमम । इन्द्रियार्धेषु वैराग्यं संप्राप्तं जन्मनः फलम ।। सन्दर्भ – कात्यायन ने धर्म को समझने के लिए कठोर तप किया, जिस से आकाशवाणी हुई और उसने कहा की हे कात्यायन तुम पवित्र सरस्वती नदी के तट पर जा कर सारस्वत मुनि से मिलो । वे धर्म के तत्व् को जान…

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प्रदोष व्रत एवं शिव पूजा

सन्दर्भ – ये उस समय की बात  है जब विश्वकर्मा ने इंद्र से बदला लेने के लिए कठोर तप कर के ब्रह्मा जी से वृत्तासुर नामक पुत्र का  आशीर्वाद लिया । वह असुर प्रतिदिन सौ धनुष (चार सौ हाथ) बढ़ता था । उसने सम्पूर्ण भूमंडल ढक लिया और इंद्र को युद्ध  के लिए ललकारने लगा । तिस…

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रावण वध की योजना

उद्देश्य – इस संधर्भ का उद्देश्य मात्र रामायण से पहले के रावण वध की प्रस्तावना और भगवान् राम के सभी सहयोगियों का परिचय कराना है जहाँ कुछ भ्रान्तिया हैं । स्कंध पुराण के अंश से मुझे निम्न लिखित उद्धरण मिला जो आपके सामने प्रस्तुत है । सन्दर्भ – सभी देवता रावण के अत्याचारों से त्रस्त…

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ब्रह्म हत्या

धर्मो हि मह्ताभेष शरणागतपालनम । शरणागतम च विप्रं च रोगिणं वृद्धमेव च ।। सन्दर्भ – यह उक्ति उस समय की है जब इंद्र बलि के पास समुन्द्र मंथन का प्रस्ताव ले कर जाते हैं । क्योंकि बलि राक्षसराज थे और उनका देवताओ से बैर था अतः वह इंद्र से मिलने के लिए भी अग्रसर नहीं…

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