Category: ज्ञान और अज्ञान
खंडन 11 – भगवान् को अस्तित्व को चुनौती देती वायरल पोस्ट का खंडन
खंडन 11 – भगवान् को अस्तित्व को चुनौती देती वायरल पोस्ट का खंडन आजकल इस प्रकार की पोस्ट, जिनमें ईश्वर की सत्ता को ही चुनौती दी जाती है,सोशल मिडिया पर खूब वायरल होती हैं | पर अगर वास्तव में, इनका थोडा भी विश्लेष्ण किया जाए तो पता चलता है कि ये पोस्ट, बहुत ही साधारण…
खंडन 10 – कोरोना स्तोत्र का सच
खंडन १० – कोरोना स्तोत्र पर शिव पुराण के नाम से फैली वायरल पोस्ट का खंडन आजकल बारम्बार लोग मुझ से इस फोटो के बारे में पूछ रहे हैं कि क्या ये फोटो शिव पुराण से हैं और ये भी कह रहे हैं कि ये कोरोना स्तोत्र शिव पुराण में वर्षों पहले से लिखा हुआ…
खंडन 7 – भविष्य पुराण के नाम पर फैलाए गए झूठ का खंडन
खंडन 7 – भविष्य पुराण के नाम पर फैलाए गए झूठ का खंडन आज कल नीचे दी गयी एक फेक/झूठी पोस्ट, सोशल मिडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें भविष्य पुराण का सन्दर्भ देकर मुस्लिमों के बारे में कुछ कहा गया है, पहले आप उस पोस्ट को देखें, उसके बाद में, उस पोस्ट की सत्यता…
नास्तिक कौन है ?
मेरे एक मित्र ने नास्तिकता पर एक पोस्ट की | उसमें नास्तिक होने की एक परिभाषा उन्होंने दी | आजकल वैसे भी सोशल मीडिया पर ये सबसे आम टॉपिक है | मैंने कहा कि वो परिभाषा गलत है | उनकी दी हुइ परिभाषा के अनुसार, नास्तिक लोग, किसी स्पष्ट प्रमाण के अभाव में, ईश्वर के…
जीवन में क्या चाहिए ?
इस संसार में केवल तीन ही चीज याद रखने लायक हैं – 1. मृत्यु २. ईश्वर ३. कर्तव्य 1. मृत्यु – क्यों ? मृत्यु को ही सबसे पहले क्यों ? ईश्वर को क्यों नहीं ? क्योंकि मृत्यु को जब आप याद करते हैं तो आपको पता चलता है कि सब को एक दिन मर जाना…
“मैं पानी में हूँ, पर गीला नहीं हूँ |”
यस्याज्ञया जगतस्रष्टा विरंचिः पालको हरिः | संहर्ता कालरुद्राख्यो नमस्तस्यै पिनाकिने || —- स्कन्द पुराण अर्थ – जिनकी आज्ञा से ब्रह्मा जी इस जगत की सृष्टि तथा विष्णु भगवान् पालन करते हैं और जो स्वयं ही कालरूद्र नाम धारण करके इस विश्व का संहार करते हैं, उन पिनाकधारी भगवान् शंकर को नमस्कार है | अंतर्ध्यान –…
अहम् ब्रह्मास्मि
क्रोधस्तु प्रथमं शत्रुर्निष्फलो देह्नाशनः, ज्ञानखड्गेन तं छित्वा परमं सुखमाप्नुयात | तृष्णा बहुविधा माया बन्धनी पापकारिणी, छित्वेतां ज्ञानखड्गेन सुखं तिष्ठति मानवः || — ब्रह्म पुराण अर्थ – मनुष्य का पहला शत्रु है क्रोध | उसका फल तो कुछ भी नहीं है, उलटे वह शरीर का नाश करता है, अतः ज्ञान रुपी खड्ग से उसका नाश…
नारद जी के समस्त प्रश्नों का समाधान
8. चौदह मनुओं के मूल दिवस का किसको ज्ञान है ? ये युगादि तिथियाँ बताई गयी हैं, अब मन्वन्तर की प्रारंभिक तिथियों का श्रवण कीजिये । अश्विन शुक्ल नवमी, कार्तिक की द्वादशी, चैत्र और भाद्र की तृतीया, फाल्गुन की अमावस्या, पौष की एकादशी, आषाढ़ की पूर्णिमा, कार्तिक की पूर्णिमा, फाल्गुन, चैत्र और ज्येष्ठ की पूर्णिमा…
ब्राह्मण के प्रकार – नारद जी के छठे एवं सातवें प्रश्न का उत्तर
किस श्रेष्ठ ब्राह्मण को आठ प्रकार के ब्राह्मणत्त्व का ज्ञान है ? विप्रवर ! अब आप ब्राह्मण के आठ भेदों का वर्णन सुने – मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि – ये आठ प्रकार के ब्राह्मण श्रुति में पहले बताये गए हैं । इनमें विद्या और सदाचार की विशेषता से पूर्व पूर्व…
दान की परिभाषा और प्रकार
द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् । चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते ।। सन्दर्भ – राजा धर्म वर्मा दान का तत्व जानने की इच्छा से बहुत वर्षों तक तपस्या की, तब आकाशवाणी ने उनसे उपरोक्त श्लोक कहा । जिसका अर्थ है “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन…