योग – 1

अर्जुन बोले – मैं योग के स्वरुप का तात्विक विवेचन सुनना चाहता हूँ | क्योंकि योग को समस्त उत्तम साधनों से भी उत्तम बताकर सब लोग उसकी बड़ी प्रशंसा करते हैं | नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! मैं संक्षेप से ही तुम्हें योग का तत्व बतलाता हूँ | इसके सुनने से भी चित्त…

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भगवान शिव और बोडे का नियम

भगवान् शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी है | त्रिपुरारी अर्थात त्रिपुर का नाश करने वाला | त्रिपुर अर्थात तीन पुर (नगर) | तारकासुर के तीन पुत्र थे, जिनके नाम तारकाक्ष, विद्युन्माली तथा कमलाक्ष थे | तारकासुर की मृत्यु के बाद, उसके तीनो पुत्रों ने घोर तप करके ब्रह्मा जी से तीन नगरों को माँगा…

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नारद जी इतने चपल क्यों ?

अर्जुन एक बार नारद जी से इस प्रकार प्रश्न किया – देवर्षि ! आप सम्पूर्ण प्राणियों के प्रति समान भाव रखने वाले, जितेन्द्रिय तथा राग-द्वेष रहित हैं | तथापि आप में जो कलह करने की प्रवृत्ति है, उसके कारण कई हजार देवता, गन्धर्व, राक्षस, दैत्य तथा मुनि नष्ट हो गए | विप्रवर ! आपकी ऐसी…

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प्रणव क्या है ?

यो विद्याचतुरो वेदान साङ्गोपानिषदो द्विजः | न चेत पुराणं सविद्यावैध्यं स ख्यातिचक्षणः || इतिहास्पुराणास्थां वेदं समुपर्वह्येत | विभेत्वल्प्श्रुताद वेदो मामर्थं प्रहरिष्यति || अर्थ – अङ्ग और उपनिषद के सहित चारो वेदों का अध्ययन करके भी, यदि पुराणों को नहीं जाना गया तो ब्राहमण विचक्षण नहीं हो सकता; क्योंकि इतिहास पुराण के द्वारा ही वेद की…

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जीवन में क्या चाहिए ?

इस संसार में केवल तीन ही चीज याद रखने लायक हैं – 1. मृत्यु २. ईश्वर ३. कर्तव्य 1. मृत्यु – क्यों ? मृत्यु को ही सबसे पहले क्यों ? ईश्वर को क्यों नहीं ? क्योंकि मृत्यु को जब आप याद करते हैं तो आपको पता चलता है कि सब को एक दिन मर जाना…

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पापकर्मों के फल

धर्मदानकृतं सौख्यमधर्माद दुखःसंभवम् | तस्माधर्मं सुखार्थाय कुर्यात पापं विवर्जयेत || लोकद्वयेऽपि यत्सौख्यं तद्धर्मात्प्रोच्यते यतः | धर्म एव मर्ति कुर्यात सर्वकार्यातसिद्धये || मुहूर्तमपि जीवेद्धि नरः शुक्लेन कर्मणा | न कल्पमति जीवेश लोकद्वयविरोधिना ||                        – स्कन्द पुराण धर्मं और दान से सुख प्राप्त होता है और अधर्म से दुःख की उत्पत्ति होती है, अतः सुख के लिए…

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अध्याय 5 – ज्योतिष शास्त्र

अध्याय – ५ हमने अध्याय 1 के अंत में संक्षेप में लिखा था कि प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है | एक नक्षत्र13020| का होता है अतः नक्षत्र के एक चरण की दूरी 13020|/4 = 3020| होती है | सवा दो नक्षत्र अर्थात ९ चरण (300 ) की एक राशि होती है | चंद्रमा…

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माहेश्वर सूत्र

“नृत्यावसाने नटराज राजः ननाद ढक्वाम नवपंच वारम। उद्धर्तु कामाद सनकादि सिद्धै एतत्विमर्शे शिव सूत्र जालम।” अर्थात नृत्य की समाप्ति पर भगवान शिव ने अपने डमरू को विशेष दिशा-नाद में चौदह (नौ+पञ्च वारम) बार चौदह प्रकार की आवाज में बजाया। उससे जो चौदह सूत्र बजते हुए निकले उन्हें ही “शिव सूत्र” या माहेश्वर सूत्र के नाम से…

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धर्म क्या है ?

नेत्युवाच ततो वैश्यः सुखं धर्मे प्रतिष्ठितं | पापे दुखं भयं शोको दारिद्रयं क्लेश एव च | यतो धर्मस्ततो मुक्तिः स्वधर्मं किं विनश्यति | (१७०/२६) धर्ममेव परम् मन्ये यथेच्छसि तथा कुरु | ब्रह्मणाश्च गुरून देवान वेदान धर्मं जनार्दंनं || यस्तु निन्द्यते पापो नासौ स्पृश्यते पापकृत् | उपेक्ष्णीयो दुर्वृतः पापात्मा धर्मदूषकः || (१७०/४५-४६) —     ब्रह्म  पुराण अर्थ…

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कमठ द्वारा शरीर वर्णन

भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे बताओ | कमठ ने कहा – विप्रवर ! जैसा यह ब्रह्माण्ड है, वैसा ही यह शरीर भी बताया गया है | पैरों का…

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